पृष्ठभूमि

भारतीय रेल द्वारा कार्गो को कंटेनरों में ढोने की महत्वपूर्ण नीति की पहल के साथ भारतवर्ष यातायात के बहुविध साधनों (मल्टीमॉडल) को प्रयोग में लाने वाले देशों के मानचित्र पर सर्वप्रथम सन् 1966 में अस्तित्व में आया। भारत की महाद्वीपीय दूरियों (जो उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक लगभग 3000 किमी है) को देखते हुए मध्यम तथा लम्बी दूरी के सभी प्रकार के कार्गो के लिए रेल यातायात अपेक्षाकृत सस्ता विकल्प हो सकता है विशेषतया यदि यातायात के दो साधनों (इंटरमॉडल) के बीच स्थानांतरण की कीमत कम की जा सके। इस समस्या का आदर्श समाधान था कंटेनरीकृत बहुविध साधनों द्वारा ‘द्वार से द्वार तक’ यातायात की सुविधा की उपलब्धता। इसी विचार के साथ भारतीय रेल ने सन् 1966 में विशेष डीएसओ कंटेनरों द्वारा आन्तरिक (डॉमेस्टिक) कार्गो को द्वार से द्वार तक ढोना आरम्भ किया।

यद्यपि भारत में सर्वप्रथम आई एस ओ सामुद्रिक कंटेनर कोचीन बंदरगाह पर सर्वप्रथम सन् 1973 में संचालित किया गया था तथापि भारतीय रेल द्वारा पहली बार सन् 1981 में आई एस ओ कंटेनरों को भारत के पहले तथा भारतीय रेल द्वारा ही प्रबंधित अन्तर्देशीय कंटेनर टर्मिनल बैंगलोर ले जाया गया।

सन् 1988 तक अन्तर्देशीय कंटेनर टर्मिनलों की संख्या बढ़कर 7 हो गई थी जिससे कंटेनरों के संचालन में वृद्धि हुई। इसके साथ ही इस विचारधारा को बल मिला कि भारत में कंटेनरीकरण को बढ़ावा देने तथा इसके विकास के प्रबंधन हेतु अलग से सक्रिय संगठन के गठन की आवश्यकता है।